60 हजार करोड़ की फैक्ट्री, लेकिन गांव के युवाओं के हाथ खाली! मधेपुरा में फूटा गुस्सा



मधेपुरा | प्रत्यक्ष न्यूज़ -रिपोर्टर Ranbir singh की खास रिपोर्ट

मधेपुरा स्थित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री को लेकर आसपास के गांवों में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई, उसी का लाभ रोजगार के रूप में स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। रोजगार में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई युवाओं ने ITI और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, लेकिन उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप फैक्ट्री में अवसर नहीं मिला। उनका मानना है कि स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आर्थिक उपलब्धियों की चर्चा के बीच बढ़ी नाराजगी

हाल ही में Alstom और भारतीय रेलवे की संयुक्त कंपनी MELPL की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परियोजना ने वित्तीय वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक आउटपुट को समर्थन दिया है। इसी रिपोर्ट के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी परियोजना होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर अपेक्षित रूप से क्यों नहीं बढ़े।


“स्थानीय स्तर पर कल-पुर्जों का निर्माण हो”

कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि फैक्ट्री में अधिकतर बाहरी स्थानों से लाए गए उपकरणों की असेंबलिंग होती है। उनका कहना है कि यदि छोटे-छोटे कल-पुर्जों का निर्माण भी मधेपुरा में कराया जाए तो स्थानीय उद्योगों और युवाओं दोनों को फायदा मिलेगा।

बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी मुद्दा

ग्रामीणों ने रोजगार के साथ-साथ क्षेत्र में बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़ी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि रोजगार के अभाव में आज भी बड़ी संख्या में युवाओं को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।

“जमीन लेते समय विकास का वादा किया गया था”

ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान स्थानीय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था। उनका आरोप है कि अब तक उन उम्मीदों के अनुरूप परिणाम नहीं दिखे हैं।

रिपोर्ट पटना में जारी होने पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि जब फैक्ट्री मधेपुरा में स्थित है, तो परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण रिपोर्ट पटना में क्यों जारी की गई। उनका कहना है कि यदि कार्यक्रम मधेपुरा में होता, तो स्थानीय लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता।

प्रबंधन का पक्ष नहीं आया

इस पूरे मामले में फैक्ट्री प्रबंधन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।

🙏🙏 रिपोर्टर Ranbir singh की खास रिपोर्ट🙏🙏

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